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।। अधूरा ।।

kavimay12345kavimay12345 May 12, 2022
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बहुत कुछ अधूरा
बहुत कुछ है पूरा .....।

जमाने की सीरत
बहानो के सूरत
वहम के अहम मे
सिमटता मन,
चाहे उड़ाना सतरंगी गुलाल
मगर जाने क्यूँ ?
किसी के मन मे ठहरता मलाल।

सिमटता हूँ अब यादों के झरोखों तले
सुरमयी ख्वाब कलियों से फूल बन गये
गीत स्नेहल कंठो से कोयल के फूटे
मन के गम मे खुशियों को पिरोता
ठहरते सड़क पर चल पड़े ।

इतना भीड़ है कि खो गया हूँ
अब एक रौशनी को,अंधेरा ढूँढता हूँ
टंगा है चाँद आसमां मे,सितारे जगमगाते है
हवाएँ रुबरू होकर मन को गनगनाते है
मगर खामोश दरिया का सिपाही हो गया हूँ मै ...।

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