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।। अब जागो ।।

kavimay12345kavimay12345 April 11, 2022
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अब जागो अब जागो
कब तक तुम मौन रहोगे.....

एक हवा भयानक बह रही
साँसों से रग रग मे थम रही
कण कण मे उसके जहर भरा
हम सबका जलता दीप बुझा
मत ऐसा संसार बनाओ ।

अब जागो अब जागो ....

तोड़ तोड़ के पत्थर वह
सींच रहा अर्थ हमारा
बड़े निरंकुश अपने ही है
कहते है यह कर्म तुम्हारा
मत ऐसे एहसास मिटाओ।

अब जागो अब जागो....

ऐसा खंडन हुआ विभाजन
बुद्धि प्रलय विपरीत प्रशासन
वैचारिक अवशेष पड़े है
अपनों से अपने लड़ते है
यह भयानक दृश्य, क्रूरता
मन मे उपजे प्रेम तोड़ता
मत ऐसा अरमान सजाओ

अब जागो अब जागो
कब तक तुम मौन रहोगे.....

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