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मेरा तुम ही आगज़ हो

kavi_divyansh_ divyakavi_divyansh_ divya November 1, 2021
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मेरी कलम के हर हर्फ़ का तुम ही अंदाज हो,
मेरी गज़ल का अंत तुम तुम ही आगाज़ हो !
बेअसर क्यों ना हो दवा मुझ पर हकीमों की,
मेरे इश्क़ के मर्ज़ का जब तुम ही इलाज हो ! !
©® ~ दिव्यांश `दिव्य´

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