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याद है मुझे इलाहाबाद की सड़के

कवि अमन कुमार शर्माकवि अमन कुमार शर्मा November 6, 2021
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दिवस ओ दिवस,
याद है मुझे इलाहाबाद की सड़के,
तुम्हे याद करते करते।
तुम्हारा खिलखिलाना,
रूठ जाना फिर मनाना।
याद है मुझे तुझे याद करते करते,
वो इलाहाबाद की सड़के।
ठंड का मौसम,
वो स्कूल तक जाना।
तेरा रूठ जाना,
मेरा मनाना याद है।
याद है मुझे तुझे याद करते करते,
वो इलाहाबाद की सड़के।
वो त्योहार की होली,
वो वसंत की रंगोली।
वो मां का आंचल,
वो पिता की बोली।
याद है मुझे तुझे याद करते करते,
वो इलाहाबाद की सड़के।
तेरा मुस्कुराना जन्म दिवस का आना,
त्योहारों की टोली,
बच्चो की वो बोली।
हा याद है मुझे तुझे याद करते करते,
वो इलाहाबाद की सड़के।
तुझे हिचकियां आना,
मेरा दौरे चले आना।
सड़क की वो बाते,
इलाहाबाद की मुलाकाते।
फूल का मौसम,
पतझड़ की बाते।
मुझे आज भी याद है तुझे याद करते करते,
वो इलाहाबाद की सड़के।
लौटने की इच्छा,
समय की प्रतीक्षा।
बातो में सावन,
लौटने को हम तुम।
मुझे याद है तुझे याद करते करते,
वो इलाहाबाद की सड़के।
जहां तुम और हम थे,
और सफर के संगीत।
तुम्हारी तस्वीर को रोज,
याद करते करते।
याद है मुझे इलाहाबाद की सड़के।

कवि अमन कुमार शर्मा
हिंदी विभाग सदस्य भागलपुर विश्वविद्यालय
7295977808,8677813813

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