तुम अब नहीं।'s image

संभाले है कई आपने कई के घर को जाना है,

तेरी महफिल तेरा आना कही रूठा जमाना है।

तेरी खुशियां मेरी महफिल दिलों ने कुछ तो जाना है,

तेरा जाना मेरा होना बेबस इक जमाना है।


बहुत कुछ सुन नहीं सकता बहुत कुछ कह नहीं सकता,

तेरे शहर में जाना है जहां रूठा जमाना है।

शहर की तक में मैं था, तेरी फिराक में मैं था,

तूने न कुछ भी जाना था मेरा रूठा जमाना है।


हालत मेरे थे बिगड़े पथ अकेले ही जाना है।

वो इलाहाबाद की सड़के वो खूनी जमाना था।

तेरा मिलना जैसे मरना मेरे महफिल में आना है।


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