नमन करता हूं।।'s image
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अश्रुओ के किनारे तो कुछ भी नहीं,
ज्ञान दीपक सा तुमने दिखाया मुझे।
आज के इस दिवस सोचता है हृदय,
ज्ञान जीवन का तुमने दिखाया मुझे।
धरती दुल्हन बनी है तेरा ये नगर,
काव्य के इस धरा का श्रोता हूं मैं।
तेरी भूमि के कण कण में खोया हृदय,
ज्ञान तर्पण का तुमने सिखाया मुझे।
आज के इस दिवस सोचता है हृदय,
ज्ञान जीवन का तुमने सिखाया मुझे।
काव्य के इस शिखर का श्रोता हूं मैं,
समर का चिंतन तुम्ही ने सिखाया मुझे।
रश्मियों का विनय जब भी पढ़ता है मन,
दिनकर की धरा को मैं करता नमन।
गांव गंगा किनारे देखे है नयन,
दिनकर की धरा को मैं करता नमन।
जन और किसानों के हृदय बसे,
काव्य से सिंहासन दिगाया तूने।
रश्मियों का कथन जब भी पढ़ता है मन,
कर्ण की वो छ्वी याद आती मुझे।
जिसने शांति को अपना सबकुछ दिया,
जिसने गांधी के संदेश का गया है वो।
आज के इस दिवस सोचता है हृदय,
ज्ञान जीवन का तुमने सिखाया मुझे।
सूरज की तरह आप जलते रहे,
मुख से दिनकर का वचन कराया हृदय।
रश्मियों का विनय जब भी पढ़ता है मन,
दिनकर की धरा को मैं करता नमन।

कवि अमन कुमार शर्मा
हिंदी विभाग सदस्य राजभाषा बिहार सरकार
हिंदी विभाग सदस्य भागलपुर विश्वविद्यालय 

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