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वो आने वाले हैं!

kaushal kumar joshikaushal kumar joshi August 6, 2022
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अंधेरों में जो कैद़ कुछ उजाले हैं,

ये उम्मीद के चराग किसने पाले हैं?

टकटकी लगा के बैठे हो राहों पे,

ख़बर झूठी थी "वो आने वाले हैं!"



खुरचता है वक़्त तो रंगीन दिखते हैं,

ये फ़ूल नहीं हैं जनाब!, छाले हैं



इनसे ही हिफ़ाज़त है आशियानों की,

कौन कहता है वीरानों का सबब जाले हैं?


यूँ तो लफ़्ज़ों को क़ैद में ही रखता हूँ,

ये उनकी याद आई है तो कुछ निकाले हैं

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