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प्यार करता हूँ मैं

kaushal kumar joshikaushal kumar joshi August 4, 2022
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चुप रहूँ या बोल दूँ! प्यार करता हूँ मैं,

मैं नहीं ख़ुद में हूँ, प्यार करता हूँ मैं,

देख कर उसको हक़ में किसी ग़ैर के,

उससे कैसे कहूँ? प्यार करता हूँ मैं



इश्क़ की आग है, ख़ाक होना है तय,

अब सुलगता रहूँ, प्यार करता हूँ मैं


उसके अरमान ही ख़्वाहिशें हैं मेरी,

मेरी क्या आरज़ू? प्यार करता हूँ मैं


मेरी आवारगी, वहशत-ए दिल भी वो,

वो ही मेरा जुनूँ, प्यार करता हूँ मैं


होंठ से ये कभी कह मैं पाया नहीं,

काग़ज़ों पे लिखूँ, प्यार करता हूँ मैं


रात से मिलके भी जो कभी ना मिली,

डूबती शाम हूँ, प्यार करता हूँ मैं


भूल जाना उसे दूर की बात है,

सोच भी कैसे लूँ! प्यार करता हूँ मैं


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