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मेरे सपने, मेरी बातें

kaushal kumar joshikaushal kumar joshi August 4, 2022
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मेरे सपने, मेरी बातें,

ख़ुशियाँ, दुखड़े, जागी रातें,

मुझ तक रहकर ख़त्म हुई


मेरे सपने, मेरी बातें....



एक ज़रा सी फाँस रहेगी,

जब तक बाक़ी साँस रहेगी,

मुझे बाँटनी थी जो तुझसे,

चुभती वो आवाज़ रहेगी,


शहनाई के शोर-शराबे,

सपनों की कितनी बारातें

मुझ तक रहकर ख़त्म हुई


मेरे सपने, मेरी बातें...


आज उदासी फिर आई है,

लौट सज़ा सी फिर आई है,

आँखों में बन कर के पानी,

याद ज़रा सी फिर आई है,


रोना उन बाँहों से लग कर,

इन आँखों की सब बरसातें

मुझ तक रह कर ख़त्म हुई 


मेरे सपने, मेरी बातें...


अगर कभी मिल पाता तुझसे,

सब दिल का कह जाता तुझसे,

ख़ुशियाँ सारी तुझे गिनाकर,

दर्द तेरा ले आता तुझसे,


पर हँसियों कि सारे तोहफ़े,

ख़ुशियों की सारी सौग़ातें,

मुझ तक रह कर ख़त्म हुई


मेरे सपने, मेरी बातें,

ख़ुशियाँ, दुखड़े, जागी रातें,

मुझ तक रह कर ख़त्म हुई 

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