पाजेब की चाहत's image
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पाजेब से कहाँ होता फिर पैरों में बंध जाना,

नृत्य कर टूटना और टूट कर फिर निखर जाना। 

बिख़रने की अलाप लिए फिर सुरों में बज जाना,

स्वय्ं संगीत एकाकी धुन में मधुर राग सा खो जाना॥ 


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