ये होली ही तो इकलौती  जो इंसानियत को सींचती।'s image
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ये होली ही तो इकलौती जो इंसानियत को सींचती।

Kapileshwar singhKapileshwar singh March 18, 2022
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होली के रंग में

न शिकवे न गिले

सभी एक रंग में मिले


न भेद हुआ न भाव हुआ

में झुका स्पर्श करने चाहे किसी का भी पाओ हुआ


ना उंच ना नीच थी

गले मिले जिनके भी

कैसी भी मन की दूरिया

हम इनसानो के ना बीच थी


ये होली ही तो इकलौती

जो इंसानियत को सींचती

ये होली ही तो इकलौती

जो इंसानियत को सींचती।

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