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रास्तो से वो गुजरती थी

Kapileshwar singhKapileshwar singh March 24, 2022
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रास्तो से वो गुजरती थी

हरपल साथ गुजरती परछाई तो मैं ही था

उसे कोई बला न छू सके

हरवक्त खुद पर लेता कांटो को

वो पांव तो मै ही था ।


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