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पहली बार देखा तुझे....

Kapileshwar singhKapileshwar singh May 1, 2022
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पहली बार देखा तुझे

एक सपना सा लगा था।

काई सालो में मुझे कोई अपना सा लगा था।

सोचा ना था दिल दे बैठुंगा किसी को

शायद इसी वजह से

मुझे वो एक सपना सा लगा था।


मुझे मालूम न था दिल लगाना किसको कहते हैं। जब लगा बैठा तो जाना कि लोग

इस हलके मीठे दर्द को कैसे सहते है।

वो तीन लब्ज़ तो जुबान पर हरदम रहते है… ..2

पर तू दूर न हो जाए मुझसे उन्हे कहने पर

वो लब्ज अंदर ही रहते है।


तेरी मेरी जिंदगी अलग अलग मोड पर चलना चाहती है।

तू वो मॉडर्न परी सी जो खुद के आसमान में उड़ना चाहती है।

मैं वही वावरा वेला जिसे जिंदगी अभी भी जिनी नहीं आती है।


जाने क्यूँ हर मंदिर हर गुरुद्वारे में तेरे नाम की दुआ मेरे दिल में आती है।

मेरी ये जिंदगी तुझसे दूर रहकर के कुछ ना कहकर के ना जाने मुझसे क्या कहना चाहती है।

बस दूर रहकर के यू सहकर के तेरा हरदिन मुस्कुराना चाहती है।

तू कोई चिज़ नहीं जो बिन तेरी मंजूरी के तुझे पाना चाहती है।

तू कोई चिज़ नहीं जो बिन तेरी मंजूरी के तुझे पाना चाहती है।

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