पहली कविता's image
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मैं कविता लिखना चाहता हूँ
लिखना चाहता हूँ उसमे वो सब
जिसे मैं प्रेम मानता हूँ
जो मेरे अनुसार हैं इस संसार का चालक
मैं कविता में कौवे का विरह लिखकर
हंसो का मिलन लिखना चाहता हूँ
और वो ज़ब हम मिलके अपने अपने घर लोटे थे न
वो किस्सा भी लिखना चाहता हूँ वहीं जगह देख कर
मुझें समझ। नहीं आया अर्थ कविता का कभी
इसलिए मैं प्रेम से भरी
अर्थ हीन सम्पूर्ण कविता लिखना चाहता हूँ
और उसमे सबसे प्यारी पंक्ति
तुम्हें लिखना चाहता हूँ

कैसे कोई इंसान हमारे लिए ख़ुदा से ज़्यदा महत्व का होजाता हैं 
और चलते हुए ख़ुदा बन जाता हैं
और कैसे कोई ख़ुदा तुम्हारा खुदका पर्सनल
भगवान बन जाता हैं
सब लिखना चाहता हूँ में तुम्हारे सम्बोधन में

नालो का नदियों में मिलना
झरनो का गिरकर एक होजाना
नदियों का सागर में मिलना
और प्रेम में दिलो का एक। होजाना भी
सबकुछ मैं बस इक़ कविता में लिखना चाहता हूँ

मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ
और तुम्हें पता हैं मैं बस तुम्हें चाहता हूँ
जैसे भंवरा गुल को, मछली जल को
लगभग जितनी एक दूसरे की पूरक चीजे हैं सब कोई
मैं चाहता हूँ इस पूरी कविता के स्थान पर बस तुम्हारा नाम लिखना
बस इतना ही

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