ज़िंदगी's image
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आदतन गुफ्तगू होती रही।
वो धीरे धीरे ज़िंदगी होती रही।
कुछ रहा दोस्ती का भी शुक्रिया।
दुनिया की भीड़ में वो बस मेरी होती रही।

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