यहाँ तबियत  एक जगह नहीं जमती  है - कामिनी मोहन।'s image
Poetry1 min read

यहाँ तबियत  एक जगह नहीं जमती  है - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan May 20, 2022
Share0 Bookmarks 33 Reads1 Likes
यहाँ तबियत  एक जगह नहीं जमती  है,
जरा-सी देर में कविता ज़ेहन बदलती है।

- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts