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तुम कहते हो बार-बार नहीं-नहीं - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan May 22, 2022
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तुम कहते हो बार-बार नहीं-नहीं,
मुझे भी हाँ सुनने की आदत नहीं। 

हँसी  नसीब  नहीं  ख़ुशी  का  ए'तिबार नहीं 
ज़िंदगी ना कह दे तो कोई हवा-ख़्वाह नहीं। 

कितने  दहर  बीते  कोई  ख़बर नहीं
दर-ब-दर सफ़र  करना  बसर नहीं। 
-© कामिनी मोहन पाण्डेय।

शब्दार्थ:
हवा-ख़्वाह : शुभ चिंतक, मित्र 

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