संपत्ति और समृद्धि है
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संपत्ति और समृद्धि है -© कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan August 10, 2022
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संपत्ति और समृद्धि है,
लेकिन वह हमको छूती नहीं है।
क्योंकि एक-एक चीज़ के लिए,
यहाँ सब आपस में ही लड़ते रहते हैं।

भावनाओं और कल्पनाओं की दुनिया,
असल जीवन में एडजस्ट नहीं होती है।
अलगाव, झुँझलाहट, तृष्णा के कारण,
तक़लीफ़े दूर नहीं होती हैं।

जब भीतर उत्पन्न हो निस्संगता,
तो वितृष्णा घेरने लगती है।
समृद्धि के विशाल सम्बल में,
मन चुप और भावनाएँ छुपने लगती है।

कोई कितनी भी कर ले कोशिश
सब कुछ के बाद भी
और भी हैं बहुत कुछ
जिसे नहीं छुपना है।
बदल रहा है जो भी उसके
होने और न होने के बीच
कविता ख़त्म हो जाए
ऐसा छुपा-छुपौवल नहीं होना है।

तो भरम नहीं प्रेम है इसलिए पृथ्वी है
काग़ज़ पर सब दर्ज़ होने के बावजूद
चीज़ों को गुरुत्वाकर्षण में गिरना है।
कुछ न कुछ कहना है,
और कुछ न कुछ सुनना है।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय 

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