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"क़दीम पिंजरे " - कामिनी मोहन

Kamini MohanKamini Mohan September 15, 2022
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कुछ रिश्ते विजिटिंग-कार्ड की तरह होते हैं
जो आलमारी के कोने में पड़े रह जाते हैं।
कभी हम उन तक कभी वो
हम तक पहुँच नहीं पाते हैं।

यह भी देख रहा हूँ कि सिर्फ़
तेज़ बारि‍श है और
क़दीम पिंजरे ठिकाने बने हुए हैं
बादलों से काग़ज़ात बिछड़े हुए हैं
भीग चुकी हैं सारी रक़म और
हक़दार तालाब व नदी तक पहुँचे हुए हैं।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय।

शब्दार्थ:
क़दीम -पुराना, प्राचीन 

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