पूँजी
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पूँजी इज्ज़त की- कामिनी मोहन पाण्डेय।

Kamini MohanKamini Mohan March 28, 2022
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पूँजी
इज्ज़त की
शोहरत की
और कुछ सामानों की।

कमरे की पुरानी आलमारी
जो अंतिम क्रिया के लिए हाथ न फैलाने दे
उस लाॅकर की,
काग़ज़ में लपेटकर
रखे हुए चंद रुपयों की।

यह हर समझदार मध्य वर्ग और ग़रीब को
संजोने को मिली हुई विरासत है।

इस विरासत में
कुछ पूँजी रख पाते हैं
कुछ खाली हाथ आए थे
खाली हाथ जाते हैं।

कुछ चेहरे की सिलवटों में पूँजी देखते हैं
एलबम को उलट-पुलट रखते हैं
जिसे कोई देखता नहीं
उस पूँजी को न जाने
ज़िंदगी के किस संग्रहालय के
किस शो-केस में रखकर चल जाते हैं।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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