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प्रेम की जमीन - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan September 9, 2022
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आवाज़ जो शांत जगह से आ रही है
अंधेरा होने से पहले लौट जा रही है
कभी तेज़-सी, कभी हल्की-सी 
उपस्थिति दर्ज़ करा रही है। 

भयमुक्त बैठा शून्य 
दिल-ए-बे-क़रार रहा
प्रेम की जमीन खुरच कर
गणित के सब अंकों को पुकार रहा। 

चाहता है शांत रहना 
अपनी उपस्थिति में दर्ज़ रहना
आहट के पूरे परिक्षेत्र को
एक सिरे से दूसरे सिरे तक बस बुनते रहना।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय 

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