" प्रेम और विश्वास के हलफ़नामे "

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" प्रेम और विश्वास के हलफ़नामे " - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan April 29, 2022
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" प्रेम और विश्वास के हलफ़नामे "
- कामिनी मोहन।

जीवन-यापन की ज़रूरत  हो  पूरी,
चाहत    सबकी   एक   जैसी    है।
बाज़ार और ख़रीदार हैसियत के हैं,
पर पेट  की  भूख   एक  जैसी  है। 

अबूझ   प्रपंच  संवाद  करते  नहीं,
यह  न्यून   महत्वाकांक्षा  जैसी  है।
दो-राहे एक दूसरे  को  देखते नहीं,
यातनाएँ स्मृतियों में ख़बर जैसी है। 

अलग-अलग   दिखते  मनुष्य  की,
दयादृष्टि        एक       जैसी    है।
वे  इतने  अलग  बिल्कुल  नहीं कि
मनुष्यता     वस्तु      जैसी      है। 

प्रेम   और  विश्वास   के  हलफ़नामे,
बड़ी-बड़ी    कहानियों     जैसी   है।
टीलों से बोलती हैं सभ्यता की मिट्टी,
ब्यौरेवार रेखांकित अंतर्दृष्टि जैसी है। 

- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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