नहीं मालूम!
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नहीं मालूम! - © कामिनी मोहन पाण्डेय।

Kamini MohanKamini Mohan September 21, 2022
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क्या होता है बोलने से?
जब सुनने वाला अनसुना कर दें।
सवाल खड़ा रहता है दरवाज़े पर
चाहे सब खिड़कियाँ बंद कर दें।
सवाल मौन है या कि उत्तर
नहीं मालूम!

अजीब क्या है?
सवाल या सवाल का जवाब
यह भी नहीं मालूम!
प्रेम है या कि घृणा है
नहीं मालूम!

जिसे सब कहते, सुनते और
उस पर बहस करते हैं
उस अनिर्णित बेख़बरी की ख़बर
नहीं मालूम!

समझना, समझाना और फिर
अलग-अलग समझे हुए का
अर्थ निकालना
अनर्थ की क्षतिपूर्ति की
क़ीमत लगाना
और मन मसोसकर
सारी क्षतियों को टटोलना
ज़रूरी को बेहद ज़रूरी बताना
इन सबका हासिल क्या है?
नहीं मालूम!

पीढ़ियाँ घिस कर मिट चुकी हैं
सारी घास सूख चुकी हैं
फिर भी उँगलियों से धरती कुरेदते रहना
सूखी हुई ठूठ बटोरना
धरती पर नक़्शा गढ़कर
उससे लिपटे रहना
हैं मालूम।

तो कविता के सुराग़
जो गहरे धसे हैं
उन्हें ढूँढ़ना
फिर उन्हें अल्फ़ाज़ देकर
अर्थपूर्ण आवाज़ें देना
क्या हमें हैं मालूम!
-© कामिनी मोहन पाण्डेय।

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