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न तेल बचे न बाती- कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan May 7, 2022
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न     तेल    बचे   न   बाती
ऐसा        जीवनाधार    है।
न   काग़ज़  बचे  न  स्याही
ऐसा  कर्म  और   प्राण  है।


कुछ  भी  नहीं  बचा  सकते
ख़र्च होना ही अटूट कार्य है।
जैसे उजाला करते जाना ही
आत्म का अहर्निश कार्य है।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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