मेरे शहर में
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मेरे शहर में - © कामिनी मोहन पाण्डेय।

Kamini MohanKamini Mohan July 5, 2022
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मेरे शहर में
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।
मेरे शहर में,
पहाड़ कहीं नहीं है,
लेकिन ख़ूब ऊँची-ऊँची बहुमंजिला अत्याधुनिक अपार्टमेंट हैं,
उनके आसपास घास-फूस नहीं है,
टाइल्स ने सब दबा दिया है
ईंटों और सीमेंट ने सब रोक दिया है।

मेरे शहर में,
दो और तीन कमरों के फ्लैट में
लोगों की पूरी दुनिया है
सड़क नहीं हाई-वे हैं
फ्लाई ओवर है
सड़क के किनारे
पके महुए की ख़ुशबू देने वाले
पेड़ नहीं है
मंज़िल पर पहुँचने का सारा अहसास
अब जीपीएस में है।

मेरे शहर में,
मेरे अपने
मेरे रास्ते के साथी नहीं है
काश! मेरे अपने-अपने ही रहते
खुले आसमान की तरह हमेशा मुझमें घुलते रहते
मेरे चलने पर चलते रहते
वर्षा, पेड़, जानवर और आदमी
सब धरती ने अपने लिए जोड़े हैं
सब परिदृश्य अंकित किए हैं
प्राथमिक ध्वनि, शब्द और धूप
प्राथमिक उद्भिज्ज
मेरे भौतिक रूप
मेरे आध्यात्मिक स्वरुप है।

मेरे शहर में,
सब सफलताएँ धरती की
आदमी की सफलता-विफलता
एक-एक कर मेरे सामने
चिर-परिचित आते और जाते हैं।

मेरे शहर में
स्मृति के संग्रहालय में
सारे फूल, सारी मधुमक्खियां
उपजे शहद से सेवित प्रेम को लेकर
शून्य शिलालेख पर अंकित होते जाते हैं
यूँ ही मेरे होंठो पर रस से ठहर जाते हैं।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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