मनुष्य के अवशेषों पर दर्ज़ स्मृति
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मनुष्य के अवशेषों पर दर्ज़ स्मृति - © कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan July 29, 2022
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मनुष्य के अवशेषों पर दर्ज़ स्मृति
जड़ों से उद्भुत कविता को रचता है।
यह आत्मीयता का यूटोपिया छंद है
जो भविष्य से रिश्ता क़ायम करता है।

लंबी उम्र है संस्कृति की
इतनी जितनी इस धरती की
इसे देखकर ज़ुबान पर अतीत की खोज
और ज़ेहन में भविष्य का अन्वेषण
होने लगता है।

संस्कृति को याद नहीं करना पड़ता
जहाँ देखो वहाँ नज़र आ जाती हैं।

इसको प्राप्त करने के लिए
लौटना होता है हमें
अपने इतिहास के पास
परंपरा से प्राप्त जीवंत वर्तमान के पास।

आदिम आह्वान कभी-कभी
अनुमान पर आच्छादित रहता है।
हो भले ही अनेकों आक्षेप और विक्षेप
लेकिन इसकी भाषाई अभिव्यक्ति
प्रामाणिकता को बुनता है।

ख़ालीपन को याददाश्त भरता है
नएपन को अपना परिचय देता है।
पहचानकर सुख और दुःख को
अलग-अलग खाँचे में रखता है।

यह कर्म के लिए निभाए गए
धर्म की तरह ईमानदार रहता है।
जो इस तरह रच बस जाता हैं जीवन में कि
अधूरे कर्तव्य कर्म को पूरा करने के लिए
विगत का इतिहास हमारे भविष्य में घुलकर
पहले परंपरा फिर संस्कृति का निर्माण करता है।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय। 

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