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माँ का नक़्श - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan May 25, 2022
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1.
माँ लोरी भरा वात्सल्य ख़ज़ाना,
अबोध शिशु तुम सुनते जाना।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय

2.
जीवन में कोई डर न फ़िक्र था वैसे
माँ ने उँगली कस के हाथों में पकड़ी हो जैसे।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

3.
पालने की डोरियां माँ खींचती जा रही थीं,
लोरियों पे लोरियां माँ सुनाती जा रही थीं।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

4.
मैं लोरी सुन रहा था मुझे नींद आ रही थीं,
रेशम से गोद में माँ नींद को सुलाती जा रही थीं।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय

5.
हर माँ की गोद में खिलती है तुम्हारी हँसी,
नस-नस में भरी ख़ुशबुएँ देती हैं ख़ुशी।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय

6.
हर्फ़ जिनसे बनता है भाई का नक़्श,
हर बहन देख लेती है माँ का नक़्श।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय

7.
अपनी-अपनी राह पर सब चलते जाते हैं,
दीवार पर माँ की तस्वीर को छोड़े जाते हैं।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय 

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