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महँगे इतने हैं काजू-बादाम - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan May 11, 2022
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महँगे   इतने    हैं    काजू  -  बादाम,
कैसे   दो   वक़्त  ख़रीद  कर  खाऊँ।
अब   तो   रोटी   सहारा   है   'मोहन'
अफ़सोस कहीं इससे दूर न हो जाऊँ।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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