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खेल तमाशा - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan September 5, 2022
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कोरे काग़ज़ पर लिखना-मिटाना
खेल-तमाशा है।
मंज़िल की जुस्तुजू में हांफते जाना
खेल तमाशा है।
ग़मों के आँसू पीकर मुस्कुराना
खेल तमाशा है।
मुसाफ़िर है सब दुनिया सराय
समझे बग़ैर ठहर जाना
खेल तमाशा है।
गुफ़्तुगू भी अजब हैं यारो
यादों को ज़ेहन में रखते जाना
खेल तमाशा है।
चार-दिन की ज़िंदगी में
ख़ुद का तमाशा देखना
खेल तमाशा है।

-© कामिनी मोहन पाण्डेय 

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