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" कवियों को पसंद है " - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan March 14, 2022
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कवियों को पसंद है
भाषा की आत्मा बन जाना
भीड़तंत्र से अलग
भीड़ का आलोचक बन जाना
शब्दों को ध्वनित कर
देह से रक्त में उतर जाना।

अपने कर्म की गतिमानता के लिए
चाहते बस थोड़ी-बहुत तारीफ़
क्योंकि उन्हें है भरोसा
वो कर सकेंगे बदलाव।

उन्हें खटकता रहता है
अकर्तव्य, अन्याय और अत्याचार
जिस तरह हर क्षण
बदल रहा है सबकुछ
रफ़्ता रफ़्ता ही सही
ऊँचा नीचा
ग़लत सही
ठीक होगा सबकुछ।

रोते हैं हँसते हैं
पर ना-उम्मीद नहीं होते हैं।

न्याय पूर्ण कर्तव्य कर्म की
करते रहते हैं बात
इसीलिए,
उन्हें न तो प्रिय है एकांत
और न ही घने सुगंधित फूलों के कांत।

बाग़ में रखते यदि क़दम
तो देख लेते फूलों की प्यास
उनके न खिलने पर
रहता सब कुछ उदास उदास
क्योंकि उजड़ जाती हैं
बहुतेरों की आस।

-© कामिनी मोहन पाण्डेय।

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