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जग के राम-जन के राम - कामिनी मोहन पाण्डेय।

Kamini MohanKamini Mohan April 11, 2022
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《जग के राम-जन के राम》
जग के  राम- जन  के राम
क़दम - क़दम सम्हाले राम

पाँव कमलदल पुष्प समान
रमते जन-जन पुण्य समान

जग के  फेरे,  घोर   अंधेरे
राम   कर  दे   दूर  तमाम

आँचल पसारे, बाँह फैलाए
तुमको  पास   बुलाते  राम

बरस - बरस   का   वीराना
फिर  छाए  बादल  बन राम

सब  मिलके  गाओ  रे चैती
लौट के  वापस  आए  राम

- © कामिनी मोहन पाण्डेय

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