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काव्यस्यात्मा by Kamini mohan

Kamini MohanKamini Mohan May 31, 2022
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कौवे   से  आलस्य  रहित
भंवरे से रस ग्राही सहित। 

हंस-सा नीर-क्षीर विवेकी 
शरीर  से हर  क्षण  नेकी। 

मृग - सा    चौकन्ना   रहो
सर्प  फण - सा   स्वरक्षी।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय

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