" इंद्रधनुष बने भी तो "
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" इंद्रधनुष बने भी तो " - © कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan September 13, 2022
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तैर कर नदी को पार कर पाना
सबके लिए संभव नहीं होता है।
गाहे-बगाहे धारणा बनाना
फिर पलट जाना संभव नहीं होता है।

कुछ रास्ते बदल जाते हैं
तो कुछ आगे बढ़ते रहने के बावजूद
मील के पत्थर पर रूके रह जाते हैं।
गाँठ पड़ जाए तो ग़ायब होते नहीं
हवाओं के चोट खाकर
पड़ी सिलवटे उभरे रह जाते हैं।

याद में दर्ज रहतीं है ज़रूरत की चीज़े
उनका प्रेम बन जाना संभव नहीं होता है
नाहक ही आत्म अटूट मौन में रहता है।
गीली मिट्टी से नेह करके
मरूस्थल भी भीगा रहता है।

प्रेम की बरसात में
आँख से टपका मोती
छिटककर रह जाता है।
इंद्रधनुष बने भी तो
किसी दस्तावेज में
दर्ज़ नहीं हो पाता हैं।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय।

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