हमसे ही युग सृजित हमसे ही खण्डित - ©️ Kamini Mohan's image
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हमसे ही युग सृजित हमसे ही खण्डित - ©️ Kamini Mohan

Kamini MohanKamini Mohan April 4, 2022
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हमसे ही युग सृजित हमसे ही खण्डित,
ये चिंतकों का चिंतन सीमित नहीं।
गणित के गाँठों में बँधी काया का
पहचान-पत्र अपरिमित नहीं।

लेकिन यहाँ प्रातः से संध्या तक
घटते-बढ़ते ग्राफ का कोई स्तर नहीं।
चश्मदीद के चश्मे पर रात है काली
धर्म व जाति के चश्मे का नम्बर एक नहीं।

मनुष्य होने की इच्छा राजनीतिक है,
क्योंकि पहचान सिर्फ़ पहचान नहीं।
दृश्यालेख को पढ़कर भी क्या फ़ायदा
अगोचर विचारों की परछाइयाँ होती नहीं।

इस दुनिया में संकट हो या कि न हो,
आकार कविता का विचारों को कुरेदता नहीं।
पहचान देह की हो या कि मनुष्य की,
कविता कभी भी चुप रहती नहीं।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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