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"एकाकी बुनियाद" - © कामिनी मोहन पाण्डेय।

Kamini MohanKamini Mohan April 22, 2022
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"एकाकी बुनियाद"

एकाकी बुनियाद
कब किसे कहाँ रहा याद।

पकड़कर सीधा रस्ता
कहाँ मिला कहाँ छूटा बस्ता।

आँखे बंद समय की ख़ूबी,
अकेले ही संध्या डूबी।

मैं दरिया इस पार अतीत रहा उस पार
क्या यही है जीवन की सार।

मैं ही मैं में कितना कुछ
पर क्षण भर में मिटता सब कुछ।

एकाकी पर ठस्सम ठस्स,
तिनका-सा रहा हूँ बस।

- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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