206.जद्दोजहद में...- कामिनी मोहन।'s image
Poetry1 min read

206.जद्दोजहद में...- कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan December 30, 2022
Share0 Bookmarks 183 Reads1 Likes
जद्दोजहद में...

कुछ रिश्ते हमेशा के लिए होते हैं 
और कुछ केवल कुछ दिनों के लिए 
ठीक वैसे ही जैसे कुछ लोग
अपने साधनों के भीतर रहते हैं
लेकिन वे कल्पना की कमी से पीड़ित रहते हैं। 

जीवन ऐसा ही है
सभी मानवीय ज़रूरतों में से 
सबसे बुनियादी ज़रूरत को 
हम सबसे पहले पूरा करने की 
जद्दोजहद में उम्र-भर लगे रहते हैं।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts