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198. सुंदर चीज़  - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan December 6, 2022
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जीवन चलता रहता है
और सप्तरंगी सपने तैरते रहते हैं। 

समंदर से आशा उठती है 
कभी मरना नहीं चाहती 
दर्द में भी 
कल के लिए 
योजना बनाती है। 

आगाज़ अंधेरी सड़क पर तेज़ी से दौड़ते हैं
समंदर की खिड़की से बाहर झाँकते हैं 
यह कल है या कि आज है
कल और आज की आवाज़ के लिए
मैं एक अध्याय हूँ 
समझते रहते हैं। 

तूफ़ान की प्रतीक्षा में
धूप का आनंद नहीं 
रास्ता खो दिया पर
ख़ुद को खोया नहीं। 

क्योंकि आज और कल 
उस अध्याय के
सिर्फ़ एकीकृत किताब है। 

लेकिन यह कठिन है क्योंकि
मैं दोनों कल में एक साथ 
खो नहीं सकता
दोनों अध्यायों को एक साथ 
पढ़ नहीं सकता। 

फिर भी
हम कहानी को 
फिर-फिर पढ़ने का निर्णय लेते हैं 

स्थिर कहानी जो 
हमने अपने दिमाग़ में 
अमर करते हुए 
अस्तित्व को समर्पित कर दी है
आकर्षित करने लगते हैं
सुंदर चीज़ कभी भी 
परिपूर्ण नहीं हो सकती
समझने लगते हैं।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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