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184.कविता में काव्यात्मक-कला - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan October 14, 2022
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कविता में काव्यात्मक-कला की उत्पत्ति का परम कारण जीवन का लय है। यह लय सदैव चैतन्य भाव में दृष्टिगोचर होता है। यह उच्च भावना को उद्भुत कर मनुष्य की विशिष्टता को ज़बान देकर अभिव्यक्त होता है।
धरती पर ऐसा कोई प्राणी नहीं है जो अपने अंतस् से उठे हर्षानंद एवं विषाद को अभिव्यक्त न करता हो। इसीलिए हर कहीं छिपे हुए भाव की अभिव्यक्ति और प्रभावहीन हो रहे मनुष्यता में प्रभावोत्पादक तत्व का सृजन कविता बन जाता है। अभिव्यंजना में लफ़्ज़ों का क़ाग़ज पर चित्रण जीवन को जागृत करता है। यह लालित्यपूर्ण, लावण्ययुक्त, विश्लेषणात्मक, आध्यात्मिक और आभ्यान्तरिक है। इन सबका एकाकी लक्ष्य जीवन के आदर्श का अंकन है।
-© कामिनी मोहन पाण्डेय।

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