173.वक़्त अंकों से नहीं है ख़ाली
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173.वक़्त अंकों से नहीं है ख़ाली - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan September 27, 2022
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वक़्त अंकों से नहीं है ख़ाली
- कामिनी मोहन।

गोल घूमती धरती के
दक्षिणावर्त्त छूट रहे
समय के संसार में
वक़्त अंकों से नहीं है ख़ाली
कोई न कोई अंक हर किसी को मिला हैं।
जीवन है चलता रहता
सिर्फ़ छूटते-पकड़ते फ़िलहाल का
फ़लसफ़ा मिला है।

अंधेरा है
उजाला है
सुख है
दुख है
नफ़रत है
प्रेम है।
इसकी बूँद चमकती ही है 
लेकिन दिखता एकपक्ष ही है।

कुछ रहता है
कुछ वाष्पित होकर चला जाता है
लेकिन ठहरने के लिए
संतृप्त होकर संघनित होना पड़ता है
अनुभव की तरह है
जिसमें अनुमान की छत है
पर सीढ़ियाँ चढ़ना कठिन जान पड़ता है।

उच्चतम शिखर और निर्जन वीरानों में
बेतरतीब घूमते विचारों के
अनगिनत स्थान है।
अतीत के धूमिल होते हुए
वर्तमान के बनते हुए
प्रतिबिंब की तरह बदलते भविष्य के
ज़ेहन को टटोलते इंसान है।
बाज़ार सब ख़रीद और बेच रहा है
कुछ उजली कुछ धुँधली जगहों के
समय चुपचाप चलायमान है।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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