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देह - धारी निष्प्राण

NITIN VERMANITIN VERMA December 10, 2021
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तू कहे जो रात को दिन समझूं, जो कहे भोर को समझूं रात
तू कह बन बामन पुण्य करूं, जो कह बन दानव मैं करूं पाप
तेरे तनिक इशारे पर मेरे शीश का तेरे चरणों से करूं मिलाप
पर रूष्ट न मुझसे हो तू प्रिय यों, मैं मर जाऊंगा कर कर विलाप
मैं प्रेम सागर में उतरा ऐसे, हिय सनेह की पतवार लिए
चाहे नौका डूबे तैर आऊं मैं, इस सागर के तुम किनार प्रिये
और जीवन, मरण तो चलते रहते, ये ईश्वर के आयाम प्रिये
आजीवन संग न पाया तेरा, मैं देह - धारी निष्प्राण प्रिये

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