और एक दिन's image
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एक दिन हिम्मत जुटा कर दोस्ती का पैग़ाम भेज ही दिया हमने

उन्होंने भी हमें निराश नहीं किया और दोस्ती का हाथ थाम लिया


फिर पहली पहली दफ़ा बात शुरू हुई हम दोनों के दरमियाँ

थोड़ी थोड़ी हिचकिचाहट सी थी हम दोनों के सवाल जवाबों में


फिर धीरे धीरे हम दोनों के दरमियाँ बैठी खामोशी हटने लगी

और हर पल हर लम्हा उसके इंतेज़ार में दिन ढलने लगा


फिर हुआ यूँ की जो शक्स एक दुजे से अनजान हुए करते थे

वक्त के साथ साथ एक दूसरे के इस क़दर क़रीब आने लगे


कि बातें हो या ना हो हम दोनों के पास

हमारी खामोशी आपस में बातें करनी लगी


~ ज्योति शर्मा ~


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