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मेरी कलम के आंसू बहते है

js7430430js7430430 October 3, 2022
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आये दिन हररोज,मेरी कलम के आंसू बहते है! 
सुबह से संध्या मेरे आंगन में,कलम के अक्षर खिलते है!! 
आये दिन हादसों से जब कलम हथेली पे रोने लगे, 
रोक नहीं पाता खुदको,मेरे भी आंसू बहते है!! 


जमीं -आसमां, तारों की तारीफ वह करते है, 
जो एक दफ़ा यहाँ ,दूसरी दफ़ा कहीं और चहकते है! 
मेरे शिल्पकार ने दिया मुझे अल्पकाल,
यहीं बदकिस्मती है पर,मुझे अक्षर सहारा देते है

तुक, लय,छंद हुए भंगुर, अब शब्द अनर्थ के बनते है 
कर्म तो कर रहा हूँ मगर, मेरे शब्द ही मुझको छलते है 
सूर-ताल  बेसूर अधेड़ हुए, 
आये दिन की मायुसी में, मेरी कलम के आंसू बहते है


© Jitendra_kumar_sarkar

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