वो नारी है's image
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नारी है एक रूप है अनेक
देखना चाहे उसे उतना देख

किसी के लिए है वो प्रेमिका
तो किसी के लिए माँ होती है 

तू कुलदेवी कुल की रक्षक कुल की गौरव है
नि‍रादर इसका इस धरती पर रौरव है 

कहीं पर बन गई यह काली
तो कही पर बनी यह दुर्गा 

इसके भेद समझ पाये कुछेक
ये नारी है इसके भेद है अनेक

बहू भी है इसका स्वरूप 
बहन भी है इसका रूप

प्राणियों में है यह सबसे महान ,क्योकी 
इसके पास है प्रेम लुटाने का वरदान ।


© जीतेन्द्र मीना ' गुरदह ' करौली ( राजस्थान )

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