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अकेलेपन में रहने का
मजा ही कुछ और है !

अकेले रोना ,
अकेले हँसना ,
खुद से बातें करना ,
अपनी यादों को सँजाना  ,

न सबके सामने रो सकते है
न सबके सामने हँस सकते है
न खुद से बातें कर सकते है
न अपनी यादों को सँजो सकते है ।

अकेलेपन में
दुख ,दर्द , जुदाई
तीनों साथ रहते है

और जो साथ रहते है
वो ही तो सच्चे साथी ,
सच्चे संगी होते है ।


: जीतेन्द्र मीना ' गुरदह ' ।
Twitter : @JitendraAuthor

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