प्यार की चाहत । Pyar Ki Chahat's image
1 min read

प्यार की चाहत । Pyar Ki Chahat

Jitendra MeenaJitendra Meena January 2, 2022
Share0 Bookmarks 134 Reads0 Likes
एक प्यार की चाहत में 
इधर-उधर भटक रहे थे हम ,
दिल लगे किसी बेबफा से
कोशिस कर रहे थे हम ,
अलबेलों की दुनिया में 
ये दिल भी अलबेला था ,
लाखों की भीड़ है दुनिया मे 
मगर , ये दिल अकेला था ,
डूबना तो हम भी चाहते थे इश्क में उसके 
मगर प्यार में ठोकर खाने का डर था उसके ,
अनजान थे बेपरवाह थे 
वो जानबूझकर लापरवाह थे ,
रूठी हुई थी जिन्दगी हमसे
कोई जिन्दगी मे आये कैसें ,
प्यार की चाहत कल भी थी 
प्यार की चाहत आज भी है ,
तन्हा कल भी थे हम 
और तन्हा आज भी है ,
सब कुछ भूल गये मगर 
बीते प्यार के पलों को भुलाए कैसे ।।

: जीतेन्द्र मीना 'गुरदह'

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts