प्रेम । Prem / Love's image
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अब तक 
प्रेम के बारे में झूट 
ही बोला गया , 

की प्रेम 
वासना है 
शरीरों का मिलना है 
प्रेम मजबूरी है

हुआ तो 
अनुभव किया

प्रेम तो
लगाव है
प्रेम तो 
निर्मल ह्रदय है
प्रेम तो 
माँ है 
प्रेम तो 
पिता है 
प्रेम तो
बन्धन है 
प्रेम तो 
वास्तविक है 
प्रेम तो 
कटु सत्य है 
प्रेम तो 
आत्माएँ है ।

© जीतेन्द्र मीना ' गुरदह '

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