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फक्र नहीं किसी को

Jitendra MeenaJitendra Meena August 4, 2022
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अद्भुत है जिंदगी 
खेल निराले है 
जो पूजेगा प्रकृति को
वो प्रकृति के रखवाले है
 
बचा पाएंगे 
हम भावी जीवन को ,
मन में कई मलाले है 

फक्र नहीं किसी को 
ना किसी को चिंता है 
डूब रहा है देश 
चलाने वाले संता बंता है

सो गई सरकारें
अंधी हो गई मानवता है 
जानते है सभी 
यह बात सबको पता है ।

© जीतेन्द्र मीना, 
गुरदह , करौली ( राजस्थान )

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