खामोशी हैं चारों ओर's image
Why do I writePoetry1 min read

खामोशी हैं चारों ओर

Jitendra MeenaJitendra Meena November 12, 2021
Share0 Bookmarks 59 Reads0 Likes
खामोशी है चारों ओर
खामोश हूँ मै भी 

सब कुछ होता देख 
शान्त हूँ मै भी 

खामोशी है अनजानी सी
खामोशी है तूफानी सी

देख रहा मै खामोशी को
करता एक तमाशा 

जैसे ! कर लिया हो खामोशी ने
बीड़ी सिगरेट का नशा 

टूटेगी खामोशी क्या होगा 
इस पल यही सोच रहा 

होगी कितनी तबाही
बैठा यही गिन रहा 

होगा कैसा मंजर 
बैठा बैठा देख रहा 

खामोशी है चारों ओर
खामोश हूँ मै भी ।।


© जीतेन्द्र मीना ' गुरदह '

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts