जिम्मेदारियां's image
Poetry1 min read

जिम्मेदारियां

Jitendra MeenaJitendra Meena June 22, 2022
Share0 Bookmarks 111 Reads0 Likes
साथ चल दी ' जिम्मेदारियां '
जब घर से निकला ,
मकसद कुछ और था
पर मंजिल !
मंजिल कहीं और थी !

घर का वो शब्द ' जिम्मेदारियां '
मकसद तक नहीं पहुंचने देता !
सपने कुछ और थे 
मगर जिम्मेदारियों का रास्ता 
वहां नहीं पहुंचता !  

भटका दिया रास्ते में
जिम्मेदारियों ने ,
फस गया वो मासूम 
जिम्मेदारी और मकसद के बीच ।

© जीतेन्द्र मीना 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts