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थे पक्षी उन्मुक्त गगन के

Shambhu Nath JhaShambhu Nath Jha May 2, 2022
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थे पंक्षी उन्मुक्त गगन के,जल थल नभ का सरताज।राजा पृथु ही खोज चुका था,कण कण भूमंडल का राज।मानव होकर मानवता भूला,यह कैसा अब बना समाज।प्रजातंत्र की राजनीति ने,कालके गाल में पहुंचाया आज।

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